गिरा हुआ गमला"
एक शहर में, प्रिया नाम की एक लड़की रहती थी जिसे बागवानी (gardening) का बहुत शौक था। उसने अपनी बालकनी में एक दुर्लभ और खूबसूरत पौधा लगाया था, जिसकी वह महीनों से देखभाल कर रही थी। वह उस पौधे को एक बड़े बागवानी मुकाबले में ले जाना चाहती थी।
मुकाबले से एक दिन पहले, एक भयंकर तूफान आया। अगली सुबह जब प्रिया अपनी बालकनी में गई, तो उसका दिल टूट गया। वह दुर्लभ पौधा गमले सहित ज़मीन पर गिरा पड़ा था, उसकी टहनियाँ टूटी हुई थीं और फूल बिखर गए थे।
प्रिया रोते हुए वहीं बैठ गई। उसे लगा कि उसकी महीनों की मेहनत बर्बाद हो गई।
तभी उसकी नज़र पौधे की जड़ पर पड़ी। जड़ अभी भी मिट्टी में मजबूती से जमी हुई थी, हालाँकि गमला टूट गया था। उसने देखा कि कुछ पत्तियाँ अभी भी हरी थीं।
प्रिया ने आँसू पोंछे और फैसला किया कि वह हार नहीं मानेगी। वह भागी-भागी बाज़ार गई, एक नया गमला और खाद लाई। उसने बहुत सावधानी से पौधे को उठाया, टूटी टहनियों को काटा और उसे नए गमले में रोपा।
जब वह मुकाबले में पहुँची, तो उसका पौधा दूसरों के पौधों की तरह बड़ा और फूलों से भरा हुआ नहीं था। वह छोटा और टूटा हुआ दिख रहा था। जब जजों ने उससे पूछा, तो उसने तूफान और पौधे के गिरने की पूरी कहानी बताई।
उसने कहा, "यह पौधा शायद आज सबसे सुंदर नहीं है, लेकिन यह सबसे मजबूत है। यह हमें सिखाता है कि तूफान हमें गिरा तो सकते हैं, लेकिन हमारी जड़ों को खत्म नहीं कर सकते।"
उस दिन प्रिया ने पहला पुरस्कार नहीं जीता, लेकिन उसे "सबसे प्रेरणादायक माली" का एक विशेष पुरस्कार मिला। उसकी कहानी ने सबको सिखाया कि असली जीत खूबसूरती में नहीं, बल्कि गिरने के बाद फिर से खड़े होने के लचीलेपन में है।
सीख: ज़िंदगी हमें कई बार गिराएगी, लेकिन जब तक हमारी जड़ें (हमारा हौसला) मज़बूत हैं, हम हमेशा दोबारा खिल सकते हैं।
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